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सचेतन 3.20 : सिद्धासन के लिए : यम और नियम

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योग के नैतिक और अनुशासनिक सिद्धांत नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में. सिद्धासन, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, एक ऐसा आसन है जो सभी सिद्धियों को प्रदान करता है। यमों में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ है, नियमों में शौच श्रेष्ठ है, वैसे आसनों में सिद्धासन श्रेष्ठ है। स्वामी स्वात्माराम जी के अनुसार, जिस प्रकार केवल कुम्भक के समय कोई कुम्भक नहीं, खेचरी मुद्रा के समान कोई मुद्रा नहीं, नाद के समय कोई लय नहीं ; उसी प्रकार सिद्धासन के समान कोई दूसरा आसन नहीं है। यम और नियम: योग के आचरण और अनुशासन योग के दो महत्वपूर्ण अंगों के बारे में, जिन्हें "यम" और "नियम" कहा जाता है। ये दोनों ही योग साधना के आधारभूत स्तंभ हैं।  यम और नियम: योग के नैतिक और अनुशासनिक सिद्धांत ये दोनों अंग योग साधना का आधार होते हैं और हमारे जीवन में नैतिकता, अनुशासन, और शुद्धता लाने में सहायक होते हैं।  यम: नैतिक अनुशासन यम का अर्थ है नैतिक अनुशासन और सामाजिक आचरण। यह उन सिद्धांतों का समूह है, जो एक योगी को समाज और स्वयं के प्रति उत्तरदायित्वों को ...

सचेतन 3.19 : आध्यात्मिक स्वतंत्रता: आत्मा की मुक्ति की यात्रा

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नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष सचेतन के इस विचार के सत्र  में.  आज हम एक गहरे और सार्थक विषय पर चर्चा करेंगे, जिसे हम "आध्यात्मिक स्वतंत्रता" कहते हैं। आध्यात्मिक स्वतंत्रता का अर्थ क्या है? यह कैसे प्राप्त होती है, और हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है? आइए, इस विषय पर गहराई से विचार करें। आज़ादी, यह शब्द सुनते ही हमारे मन में गर्व, उत्साह और साहस की भावना जाग्रत होती है। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि आज़ादी का सही अर्थ क्या है? क्या यह केवल बाहरी स्वतंत्रता है, या इससे अधिक गहरा और व्यापक अर्थ है? आइए, इस विषय पर गहराई से चर्चा करें। आज़ादी का सबसे पहला और प्रत्यक्ष अर्थ है बाहरी स्वतंत्रता। यह वह अवस्था है जहाँ एक देश, समाज, या व्यक्ति पर किसी और का नियंत्रण नहीं होता। एक स्वतंत्र देश अपने निर्णय खुद लेने के लिए सक्षम होता है, और वहाँ के नागरिक स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं, अपने धर्म का पालन कर सकते हैं, और अपने अधिकारों का आनंद ले सकते हैं। लेकिन आज़ादी का अर्थ केवल बाहरी स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। आध्यात्मिक स्वतंत्रता का अर्थ: आध्यात्मिक ...

सचेतन 3 17 18 नाद योग अंतरस्थ विषय योग और ध्यान की गहनता का केंद्र

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नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में.  आज हम बात करेंगे "अंतरस्थ विषय" के बारे में, जो योग और ध्यान की गहनता का केंद्र होता है। यह विषय योग साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे ध्यान को गहराई तक ले जाने में मदद करता है। आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें। अंतरस्थ विषय का अर्थ: अंतरस्थ विषय का अर्थ है वह आंतरिक केंद्र या विषय जिस पर योगी अपने ध्यान को केंद्रित करता है। यह विषय बाहरी संसार से हटकर हमारे आंतरिक संसार से संबंधित होता है। अंतरस्थ विषय पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी साधना गहरी और स्थिर हो जाती है, और हम आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर होते हैं। अंतरस्थ विषय के प्रकार: चक्र (ऊर्जा केंद्र): योग में विभिन्न चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना एक प्रमुख अंतरस्थ विषय है। जैसे मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा, और सहस्रार चक्र। इन चक्रों पर ध्यान केंद्रित करके साधक अपनी आंतरिक ऊर्जा को जागृत करता है और चेतना की उच्चतर अवस्था में प्रवेश करता है। श्वेतार्क: श्वेतार्क एक विशेष प्रकार क...

सचेतन 3 17 नाद योग अंतरस्थ विषय योग और ध्यान की गहनता का केंद्र

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नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में.  आज हम बात करेंगे "अंतरस्थ विषय" के बारे में, जो योग और ध्यान की गहनता का केंद्र होता है। यह विषय योग साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे ध्यान को गहराई तक ले जाने में मदद करता है। आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें। अंतरस्थ विषय का अर्थ: अंतरस्थ विषय का अर्थ है वह आंतरिक केंद्र या विषय जिस पर योगी अपने ध्यान को केंद्रित करता है। यह विषय बाहरी संसार से हटकर हमारे आंतरिक संसार से संबंधित होता है। अंतरस्थ विषय पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी साधना गहरी और स्थिर हो जाती है, और हम आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर होते हैं। अंतरस्थ विषय के प्रकार: चक्र (ऊर्जा केंद्र): योग में विभिन्न चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना एक प्रमुख अंतरस्थ विषय है। जैसे मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा, और सहस्रार चक्र। इन चक्रों पर ध्यान केंद्रित करके साधक अपनी आंतरिक ऊर्जा को जागृत करता है और चेतना की उच्चतर अवस्था में प्रवेश करता है। श्वेतार्क: श्वेतार्क एक विशेष प्रकार क...