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सचेतन 3.45:नाद योग: आत्मा की दिव्यता और परमपद की प्राप्ति

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नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपके पसंदीदा "सचेतन" कार्यक्रम में। आज हम एक विशेष कथा के माध्यम से सूर्य, चन्द्र, और अग्नि का ध्यान और इसके माध्यम से आत्मा की दिव्यता और परमपद की प्राप्ति पर चर्चा करेंगे। यह कथा हमें आत्मा की गहराइयों में झांकने और दिव्यता की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाएगी। कथा: ऋषि विश्वामित्र और साधक अर्जुन बहुत समय पहले, हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक ऋषि आश्रम था। इस आश्रम में महान ऋषि विश्वामित्र तपस्या किया करते थे। उनके पास कई शिष्य थे, जो आत्म-साक्षात्कार की दिशा में साधना कर रहे थे। उनमें से एक शिष्य का नाम था अर्जुन । अर्जुन की एक ही अभिलाषा थी—परमपद की प्राप्ति, यानी मोक्ष और आत्मा की दिव्यता का अनुभव करना। अर्जुन हर दिन ध्यान और साधना करते, लेकिन उन्हें अभी तक आत्म-साक्षात्कार नहीं हुआ था। वह बेचैन रहते थे कि कैसे वह अपने मन और आत्मा को पूरी तरह से शांत और शुद्ध कर पाएं। अर्जुन की जिज्ञासा एक दिन अर्जुन ने ऋषि विश्वामित्र से पूछा: "गुरुदेव, मैं साधना करता हूँ, ध्यान करता हूँ, लेकिन मुझे शांति और मोक्ष का अनुभव नहीं हो रहा है। कृपया मुझे व...