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सचेतन 3.26: नाद योग: आत्म-साक्षात्कार

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स्वयं को जानने की यात्रा नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में।और आज हम बात करेंगे एक ऐसे विषय पर, जो हमारे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है—आत्म-साक्षात्कार, यानी स्वयं को जानने की यात्रा। आत्म-साक्षात्कार का मतलब है अपने असली स्वरूप को पहचानना, यह समझना कि हम केवल यह शरीर और मन नहीं हैं, बल्कि उससे कहीं अधिक हैं। यह एक ऐसी यात्रा है, जिसमें हम अपने भीतर झांकते हैं, अपनी आत्मा से जुड़ते हैं, और अपने वास्तविक अस्तित्व को समझते हैं। आत्म-साक्षात्कार क्या है? आत्म-साक्षात्कार का सीधा सा मतलब है—खुद को जानना। हम अक्सर अपने बारे में जो सोचते हैं, वह हमारे समाज, परिवार, और दुनिया से प्राप्त हुई धारणाओं पर आधारित होता है। लेकिन असली आत्म-साक्षात्कार तब होता है जब हम इन सब धारणाओं से परे जाकर अपने भीतर की गहराईयों को पहचानते हैं। यह वह क्षण होता है जब हमें अहसास होता है कि हमारा असली स्वरूप शुद्ध चेतना है—एक असीमित और अनंत अस्तित्व। आत्म-साक्षात्कार की यात्रा कैसे शुरू करें? ध्यान और प्राणायाम: ध्यान और प्राणायाम आत्म-साक्षात...

सचेतन 3.22 : नाद योग: एक आध्यात्मिक सफर

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नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम एक ऐसे आध्यात्मिक सफर पर निकलने जा रहे हैं, जो आपके मन और आत्मा को शांति और संतुलन प्रदान करेगा। आज का विषय है "नाद योग: एक आध्यात्मिक सफर।" नाद योग, जिसे ध्वनि योग भी कहा जाता है, योग का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण अंग है। नाद का मतलब होता है ध्वनि या कंपन, और योग का मतलब होता है जुड़ना। इस प्रकार, नाद योग का अर्थ है ध्वनि या संगीत के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के साथ जुड़ना। यह योग की एक ऐसी पद्धति है जिसमें ध्वनि के माध्यम से ध्यान और आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया होती है। नाद योग का इतिहास नाद योग की उत्पत्ति वेदों और उपनिषदों में बताई गई है। इसे प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा साधना का एक प्रमुख साधन माना जाता था। नाद योग के माध्यम से वे उच्चतम चेतना की अवस्था को प्राप्त करते थे। यह योग पद्धति न केवल भारतीय संस्कृति में बल्कि तिब्बती बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। नाद योग के प्रकार नाद योग को मुख्य रूप से दो प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है: आहट नाद : यह ब...

सचेतन 3.11 : नाद योग: हमारे जीवन की सच्चाई हमें परमपद की ओर अग्रसर करती है

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सूक्ष्मतम नाद से जीव, ईश्वर और ब्रह्म की सत्ता का ज्ञान नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में, जहाँ हम आपको ध्यान योग साधना की गहराइयों में ले चलेंगे। इस दस मिनट के कार्यक्रम में, हम जानेंगे कि किस प्रकार ध्यान योग साधना द्वारा हमारे जीवन के अनेक जन्मों के पापों का नाश संभव है, और यह कैसे हमें परमपद की ओर अग्रसर करती है। पापों का नाश अगर पर्वत के समान अनेक जन्मों के संचित पाप हों, तो भी ध्यान योग साधना के माध्यम से उनका नाश संभव है। अन्य किसी साधन से पापों का नाश संभव नहीं है। ध्यान योग के अभ्यास से हम अपनी आत्मा की शुद्धि कर सकते हैं और पापों से मुक्ति पा सकते हैं। बीजाक्षर से परे बीजाक्षर "ॐकार" से परे बिन्दु स्थित है, और उसके ऊपर नाद विद्यमान है। इस नाद में एक मनोहर शब्द ध्वनि सुनाई पड़ती है। जब हम इस नादध्वनि के अक्षर में विलय हो जाते हैं, तो एक शब्दविहीन स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे "परमपद" के नाम से जाना जाता है। अनाहत शब्द अनाहत शब्द, जिसे हम मेघ गर्जना की तरह प्रकृति का आदि शब्द कह सकते हैं, का ज...