सचेतन- 02: इस्लाम में साधना का अर्थ
सचेतन- 02: इस्लाम में साधना का अर्थ साधना (Spiritual Practice) का स्पष्ट और सुंदर वर्णन कुरान (Qur'an) में भी किया गया है, यद्यपि शब्द "साधना" संस्कृत शब्द है और कुरान में यह शब्द नहीं आता, फिर भी इसका भाव और स्वरूप कुरान में गहराई से मौजूद है। इस्लाम में साधना का अर्थ है — ईश्वर (अल्लाह) से जुड़ने के लिए आत्म-शुद्धि, नम्रता, और सतत प्रयास। कुरान साधना को कई रूपों में प्रस्तुत करता है, जैसे: इबादत (عبادة – Worship / उपासना) "और मैंने जिन्न और इंसान को सिर्फ इसलिए पैदा किया कि वे मेरी इबादत करें।" (Qur'an – Surah Adh-Dhariyat 51:56) भावार्थ: मनुष्य का उद्देश्य ईश्वर की सच्ची उपासना करना है — यही साधना का मूल है।इसका मतलब है अल्लाह की आज्ञा का पालन करना और उसकी पूजा करना, जिसमें प्रार्थना, उपवास, दान और अन्य धार्मिक कर्तव्य शामिल हैं. जिन्न, जो आग से बने हैं, मनुष्यों से पहले बनाए गए थे और वे अदृश्य प्राणी हैं जो मनुष्यों को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन मनुष्य उन्हें नहीं देख सकते. तज़क्कुर व तफ़क्कुर (Self-reflection and contemplation) "क्या वे स्वयं...