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सचेतन- 29 आपकी चेतना एक स्वयं-प्रकाशित सूर्य है

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सचेतन- 29 आपकी चेतना एक स्वयं-प्रकाशित सूर्य है क्या आपने कभी रुककर यह सोचा है— कि आपकी आँखों से जो देख रहा है, वो कौन नहीं… बल्कि क्या है? हम पूरी ज़िंदगी यह मानकर चलते हैं कि हम एक शरीर के अंदर बैठे हुए एक छोटे से इंसान हैं— जो बाहर की दुनिया को देख रहे हैं। जैसे हम एक छोटी-सी मोमबत्ती हों, और दुनिया बहुत बड़ी और अँधेरी। लेकिन अगर यह मानना ही ग़लत हो तो? अगर आप देखने वाले नहीं, बल्कि वो रोशनी हों जिसकी वजह से सब कुछ दिखाई देता है? यह कोई मोटिवेशनल लाइन नहीं है, और न ही कोई कल्पना। यह एक बहुत पुराना सत्य है, जिसे हज़ारों साल पहले अद्वैत वेदांत में समझाया गया। इसका सार बहुत सरल है— आपकी चेतना कोई छोटी-सी चीज़ नहीं है। वो एक स्वयं-प्रकाशित सूर्य है। वो आपके विचारों को, आपकी भावनाओं को, आपके शरीर को और पूरी दुनिया को रोशन करती है। आदि शंकराचार्य ने आत्मबोध नाम का ग्रंथ लिखा, मोमबत्ती बनाम सूर्य अधिकतर लोग खुद को एक मोमबत्ती की तरह महसूस करते हैं। छोटी। नाज़ुक। आस-पास की चीज़ों पर निर्भर। कोई कुछ कड़वा बोल दे— तो मन टूट जाता है। कोई असफलता मिल जाए— तो लगता है स...

आपके दिमाग का सबसे बड़ा झूठ क्या है जो आपको हर पल बोलता है?

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सचेतन- 26 सबसे बड़ा झूठ जो आपका मन हर पल आपसे बोलता है क्या हो अगर आपको बताया गया सबसे बड़ा झूठ किसी और ने नहीं… आपके अपने मन ने बताया हो? और वो भी— हर सेकंड। हर पल। वो आवाज़ जो कहती है— “मैं सोच रहा हूँ।” “मैं कर रहा हूँ।” “मैं देख रहा हूँ।” लेकिन एक पल रुककर सोचिए— अगर यह “मैं” ही असली न हो तो? अगर यह सिर्फ़ एक नक़ली पहचान हो— जो उस शक्ति का क्रेडिट ले रही हो जो असल में उसकी है ही नहीं? एक बहुत पुराना, गहरा ज्ञान है जो इस भ्रम का पर्दा हटा देता है। और जब आप उसे सच में देख लेते हैं, तो अहंकार की पूरी इमारत धीरे-धीरे ढहने लगती है। आपके मन में बैठा नक़ली ‘मैं’ सुबह आँख खुलते ही आपके सिर में एक कथावाचक चालू हो जाता है। “मैं जानता हूँ।” “मुझे यह चाहिए।” “मुझे ऐसा लग रहा है।” हम पूरी ज़िंदगी इसी आवाज़ को अपना असली रूप मान लेते हैं। जैसे यही “मैं” हमारी ज़िंदगी का CEO हो— जो हर सोच और हर काम का मालिक है। लेकिन यही “मैं” हमारे ज़्यादातर तनाव और दुखों की जड़ है। क्योंकि जब हम खुद को इस छोटे, नाज़ुक “मैं” मान लेते हैं, तो डर शुरू हो जाता है— असफल होने का डर। लोग क्या...