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सचेतन-65 : शब-ए-बारात के बारे में जानकारी

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शब-ए-बारात, जिसे 'बरात की रात' के रूप में भी जाना जाता है, इस्लामी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं रात को मनाई जाती है। यह रात मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र मानी जाती है। माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद इस शुभ रात को मक्का पहुंचे थे । एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, उनकी पत्नी हज़रत आयशा सिद्दीका ने एक बार उन्हें गायब होते हुए देखा और उन्हें खोजने निकल पड़ीं। बाद में, उन्होंने उन्हें मदीना के कब्रिस्तान में पाया, जहाँ वे मृतकों की क्षमा के लिए प्रार्थना कर रहे थे। बिल्कुल, शब-ए-बारात की रात का धार्मिक महत्व मुसलमान समुदाय में बहुत गहरा है। इस रात को लोग अपने पापों की माफी और आने वाले वर्ष के लिए बरकतों की दुआएं मांगते हैं। यह विश्वास है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को खास तौर पर सुनते हैं और उनके भाग्य का फैसला करते हैं। इसलिए, यह रात इबादत, दुआ, और सच्ची निष्ठा के विशेष प्रदर्शन के लिए जानी जाती है। यह भावना उन्हें एक नई शुरुआत और आत्मिक शुद्धि का अवसर प्रदान करती है। शब-ए-बारात को इस्लाम में इबादत, तौबा और मगफिरत की रात माना जाता है, लेकिन इसके लिए कोई खास...