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सचेतन, पंचतंत्र की कथा-45 : चूहे और भिक्षुक की प्रेरणादायक कहानी

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"नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका 'सचेतन पॉडकास्ट' में। आज की कहानी एक चूहे, साधु और भिक्षुक के बीच की है, जो हमें सिखाती है कि आत्मविश्वास और साहस कैसे संसाधनों पर निर्भर करता है। तो आइए, कहानी शुरू करते हैं।" कहानी की शुरुआत ऐसे हुई की एक दिन, एक भिक्षुक मंदिर की यात्रा पर आया। लेकिन मंदिर के साधु का पूरा ध्यान एक चूहे को डंडे से मारने पर था। साधु भिक्षुक से मिल भी नहीं पाए। इसे अपना अपमान समझते हुए भिक्षुक क्रोधित हो गया और बोला: "मैं आपके आश्रम में फिर कभी नहीं आऊंगा। लगता है, मेरे आने से ज्यादा आपके अन्य काम महत्वपूर्ण हैं।" साधु ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया: महोदय, मुझे क्षमा करें। लेकिन यह चूहा मेरी सबसे बड़ी परेशानी बन चुका है। यह किसी भी तरह से मेरे पास से भोजन चुरा ही लेता है।" साधु की समस्या  साधु ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा: यह चूहा इतना चालाक और ताकतवर है कि किसी भी बिल्ली या बंदर को हरा सकता है, अगर बात मेरे कटोरे तक पहुँचने की हो। मैंने हर कोशिश कर ली, लेकिन यह किसी न किसी तरीके से भोजन चुरा ही लेता है।" भिक्षुक ने साधु की बातों को ...

सचेतन 2.112 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - हनुमान जी की रणनीति- सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना

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सचेतन 2.112 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - हनुमान जी की रणनीति- सीता की दुरवस्था बताकर वानरों को लङ्का पर आक्रमण करने के लिये उत्तेजित करना हनुमान जी का आत्मविश्वास और शक्ति की पराकाष्ठा स्पष्ट थी।  नमस्कार और स्वागत है "महानायक हनुमान" के बारे में सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना पर चर्चा करेंगे, जब पवनकुमार हनुमान जी ने वानरों को लंका पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। हनुमान जी ने जब सीता जी की दुरवस्था देखी, तो उन्होंने वानरों को उत्साहित करने के लिए यह कथा सुनाई— हनुमान जी कहते हैं -  "कपिवरो! श्रीरामचन्द्रजी का उद्योग और सुग्रीव का उत्साह सफल हुआ। सीताजी का उत्तम शील-स्वभाव देखकर मेरा मन अत्यन्त संतुष्ट हुआ। वानरशिरोमणियो! जिस नारी का शील-स्वभाव आर्या सीता के समान होगा, वह अपनी तपस्या से सम्पूर्ण लोकों को धारण कर सकती है अथवा कुपित होने पर तीनों लोकों को जला सकती है। राक्षसराज रावण सर्वथा महान् तपोबल से सम्पन्न जान पड़ता है। जिसका अङ्ग सीता का स्पर्श करते समय उनकी तपस्या से नष्ट नहीं हो गया। हाथ से छू जाने पर आग की लपट भी वह काम नहीं कर...