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सचेतन- 11: समझदारी (Wisdom) – अनुभव और विवेक का मेल

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जब मन स्थिर होता है, तब विज्ञान जाग्रत होता है — और जब विज्ञान शुद्ध होता है, तब प्रज्ञा (आत्मिक बोध) प्रकट होती है। "जब मन स्थिर होता है..." 👉 यानी जब मन चंचलता छोड़कर शांत और एकाग्र होता है, तब वह इंद्रियों से मिली जानकारियों को सही तरह से ग्रहण कर सकता है। "...तब विज्ञान जाग्रत होता है..." 👉 विज्ञान (यहाँ अर्थ है विवेकपूर्ण बुद्धि ) उस समय जाग्रत होती है जब मन में स्पष्टता होती है। हम चीज़ों को जैसे हैं, वैसे देखने लगते हैं—बिना भटकाव या भ्रम के। "...और जब विज्ञान शुद्ध होता है, तब प्रज्ञा प्रकट होती है।" 👉 जब हमारी बुद्धि (विज्ञान) स्वार्थ, मोह, या भ्रम से मुक्त होती है, तब आत्मिक बोध— प्रज्ञा —का उदय होता है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति सत्य को पहचानने लगता है, और अपने आत्मस्वरूप को समझने लगता है। एक छोटे दृष्टांत के माध्यम से: जैसे एक शांत झील में आकाश स्पष्ट दिखता है, वैसे ही शांत मन में ज्ञान स्पष्ट होता है। और जब यह ज्ञान निर्मल हो जाता है, तो आत्मा की गहराई से प्रज्ञा की झलक मिलती है। "जीवन में समझदारी (Wisdom) के लिए अनुभव और विवेक ...