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सचेतन- 10: "ऋतम् वद" — सत्य और नियम में जियो, वही परम जीवन है।

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ऋत के माध्यम से अमृत (ज्ञान, आत्मा, स्वर्ग) की अनुभूति होती है। "ऋतम् वद" का अर्थ है — सत्य बोलो, सत्य जियो, और जीवन को नियम व नैतिकता के मार्ग पर चलाओ । यह केवल सच बोलने की बात नहीं, बल्कि अपने विचार, वाणी और कर्म में सत्य, न्याय, और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को अपनाने की शिक्षा है। "सत्य" — जो अटल और शुद्ध है, उसे जानना और उसी के अनुसार जीना। "नियम" — जो जीवन को संतुलन और अनुशासन में रखे, उनका पालन करना। सार : जब हम सत्य और नियम के संग जीते हैं, तब हमारा जीवन न केवल व्यक्तिगत रूप से सफल होता है, बल्कि संपूर्ण समाज और प्रकृति के साथ भी सामंजस्य में रहता है — यही परम जीवन है। "ऋतेन दीधारममृतं स्वर्विदं" भावार्थ: ऋत के माध्यम से अमृत (ज्ञान, आत्मा, स्वर्ग) की अनुभूति होती है। ऋत के लक्षण (नैतिक और दार्शनिक अर्थ में): ऋत के क्षेत्र उसका स्वरूप ब्रह्मांड में ग्रहों की गति, ऋतुएँ, प्राकृतिक संतुलन समाज में सत्य, धर्म, न्याय, कर्तव्य व्यक्तिगत जीवन में सदाचार, संयम, ईमानदारी, करुणा आत्मिक रूप में ईश्वर के नियमों का पालन, अहिंसा, ध्यान ऋत और धर्म में ...

सचेतन- बुद्धचरितम् 23- 19-20 सर्ग - बुद्ध का चातुर्मास तक स्वर्ग में रुकना

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सचेतन- बुद्धचरितम् 23- 19-20 सर्ग - बुद्ध का चातुर्मास तक स्वर्ग में रुकना  जब महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान और उपदेशों से कई शास्त्रज्ञों को जीत लिया, तब वे राजगृह से अपने जन्म स्थान—अपने पिता राजा शुद्धोदन के नगर कपिलवस्तु की ओर लौटे। पुत्र के आने का समाचार सुनकर राजा शुद्धोदन बहुत प्रसन्न हुए। वे नगरवासियों के साथ बुद्ध से मिलने के लिए निकल पड़े। लेकिन जब उन्होंने बुद्ध को देखा, तो वे बहुत दुखी हो गए। बुद्ध अब साधु के रूप में थे— काषाय वस्त्र (गेरुए वस्त्र) पहने हुए, सिर मुंडा हुआ, शांत और गंभीर। यह दृश्य देखकर राजा को बड़ा दुःख हुआ, क्योंकि वे अपने बेटे को अब भी केवल एक पुत्र की दृष्टि से ही देख रहे थे, न कि एक बुद्ध के रूप में। बुद्ध ने जब यह देखा कि उनके पिता उन्हें अभी भी सांसारिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं, तो उन्होंने अपनी योग शक्ति का प्रयोग किया। वह आकाश में उड़ गए। वहाँ उन्होंने कभी बिजली की तरह चमक दिखाई, तो कभी बादलों की तरह वर्षा की। यह चमत्कार देखकर सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। बुद्ध ने आकाश में खड़े होकर ही उपदेश देना शुरू किया । उन्होंने अपने पिता से कहा, “हे र...