संदेश

भगवान लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सचेतन, पंचतंत्र की कथा-61 : भगवान ने जो लिखा है, उसे कोई नहीं मिटा सकता।

चित्र
जब हिरण्यक और लघुपतनक बातचीत कर रहे थे, मंथरक भी वहां आ पहुंचा। हिरण्यक ने चिंता जताई कि अगर शिकारी आता है, तो मंथरक की वजह से सबको खतरा हो सकता है। उन्होंने मंथरक को लौट जाने को कहा, लेकिन मंथरक ने बताया कि वह अपने मित्र के दुःख को सहन नहीं कर पा रहा था, इसलिए वहां आया। उसने कहा कि मित्रों का साथ ही सबसे बड़ी ताकत है। जब वह सब कुछ कह रहा था, उसी समय एक शिकारी जिसने अपने कान तक धनुष की डोरी खींच रखी थी, वहां पहुँच गया। चूहे ने शिकारी को देखते ही चित्रांग को बाँधने वाली रस्सी को तुरंत काट दिया और चित्रांग तेजी से पीछे मुड़कर भाग गया। लघुपतनक पेड़ पर चढ़ गया और हिरण्यक पास के एक बिल में घुस गया। हिरण के भाग जाने से शिकारी उदास हो गया और सोचा, "हालांकि विधाता ने हिरण को मेरे हाथ से निकाल लिया, फिर भी उसने मेरे भोजन के लिए इस कछुए का प्रबंध कर दिया है। इसके मांस से मेरे परिवार का भोजन होगा।" यह सोचकर वह कछुए को घास में छिपाकर, अपने कंधे पर रखकर घर की ओर चल पड़ा। जब शिकारी उसे ले जा रहा था, हिरण्यक ने दुखी होकर कहा, "हाय! अब तो बड़ा दुःख आ पहुँचा है। मैं एक दुःख से अभी उभरा भ...

सचेतन, पंचतंत्र की कथा-17 : "बुनकर की वीरता और भगवान नारायण का हस्तक्षेप"

चित्र
नमस्कार दोस्तों! आपका स्वागत है सचेतन के इस विचार के सत्र  में में, जहाँ हम सुनते हैं अद्भुत और प्रेरणादायक कहानियाँ। आज की कहानी एक बुनकर की है, जिसने विष्णु का रूप धारण कर छल किया, लेकिन अंततः अपनी वीरता और बलिदान के लिए प्रसिद्ध हुआ। यह कहानी छल, साहस, और भगवान नारायण के हस्तक्षेप की है। तो चलिए, शुरू करते हैं। https://sachetan.org/   बुनकर का संकल्प और युद्ध की तैयारी सबेरे बुनकर ने दातुन करने के बाद राजकुमारी से कहा, "मैं सब शत्रुओं का नाश करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करूँगा। आज सबेरे तुम्हारे पिता को अपनी सेना के साथ नगर के बाहर युद्ध के लिए निकलना होगा। मैं आकाश में रहकर शत्रुओं को निस्तेज कर दूंगा। इसके बाद तुम उन्हें मार सकोगे। मैं खुद उन्हें नहीं मारूंगा, क्योंकि अगर मैं उन्हें मारता हूँ, तो वे स्वर्ग में चले जाएंगे। इसलिए ऐसा होना चाहिए कि वे भागते हुए मारे जाएं और स्वर्ग न पहुँच पाएं।" राजकुमारी ने यह सारी बात अपने पिता को जाकर बताई। उसकी बातों में पूरा विश्वास करते हुए राजा ने सवेरे अपनी सुसज्जित सेना के साथ नगर के बाहर निकलने का निश्चय किया। बुनकर भी, जो मरने का...