सचेतन, "मेरा नया बचपन"
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आप सबका हमारे आज के विचार के सत्र में। आज हम बात करेंगे एक ऐसी कविता के बारे में, जिसने हमारे दिल को छू लिया और हमें अपने बचपन के उन अनमोल पलों की याद दिलाई। आज का हमारा विषय है — "मेरा नया बचपन।" यह कविता हमें उन मधुर पलों की बात करती है, जिन्हें हम सभी ने महसूस किया है, जब जीवन पूरी तरह से चिंता-रहित, स्वतंत्र और खुशियों से भरा हुआ था। बचपन के वे दिन... एक ऐसा समय था, जब हमें दुनिया की कोई चिंता नहीं थी। न ऊँच-नीच का फर्क था, न कोई जिम्मेदारी। अगर आप सोचें, तो बचपन का सबसे बड़ा उपहार है उसकी सरलता और खुशियों की मासूमियत। आज हम कवयित्री, सुभद्रा कुमारी चौहान जी, की कविता में अपनी उन बचपन की यादों को जीवंत करती हैं, जो किसी भी इंसान के दिल को छू सकती हैं। कविता की शुरुआत में कवयित्री अपने बचपन की यादों को याद करती हैं। वे बताती हैं कि कैसे बचपन में बिना किसी चिंता के खेलने-कूदने और मस्ती करने का मजा कुछ और ही था। वह मस्त समय, जब कोई ऊँच-नीच नहीं थी, न कोई बंधन, न कोई बोझ। सिर्फ खुली हवा में हँसी-खुशी का आकाश था। उस समय में जीवन की मासूमियत का एक अनो...