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सचेतन- 08: सच्चे साधक का मार्ग

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"तपसा ब्रह्म विजिज्ञासस्व" — यजुर्वेद “तप द्वारा ब्रह्म को जानने का प्रयास करो।” यानी तप आत्मा और परमात्मा को जोड़ने वाला साधन है। तप का व्यावहारिक रूप (आज के जीवन में) तप आज के अर्थ में सुबह जल्दी उठना शरीर और मन पर अनुशासन क्रोध को रोकना मन का तप अहिंसा और करुणा से व्यवहार हृदय का तप मोबाइल या वाणी पर संयम इंद्रिय तप सेवा करना बिना दिखावे अहंकार का तप "तप वह अग्नि है, जिसमें अहंकार जलता है, और आत्मा शुद्ध होकर परमात्मा से मिलती है।" यह सच्चे साधक का मार्ग है — जो जीवन को तपोभूमि बनाता है। वेद मंत्र: "ऋतम् च सत्यम् च अभिध्धात तपसः अधिजायत" (ऋग्वेद 10.190.1) "ऋतं च सत्यं च अभिध्यात तपसः अधिजायत।" "ऋत (धर्म/नैतिकता) और सत्य, तप (साधना) से उत्पन्न हुए हैं।" यह मंत्र कहता है कि तप (आत्मिक साधना) के माध्यम से ही संसार में ऋत (नियम, नैतिकता) और सत्य की उत्पत्ति हुई। अर्थात सच्चा धर्म और सत्य उसी को प्राप्त होता है, जो तप करता है , यानी जिसने अपने मन, वाणी और कर्म को संयमित करके साधना का मार्ग अपनाया है। गूढ़ अर्थ: "तपस्" का...