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सचेतन:बुद्धचरितम्-14 कुमारान्वेषणम् - बुद्ध का वन में दृढ़ निश्चय

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https://sachetan.org/blog/budhcharitam/ https://zoom.us/meeting/register/tJwpdeGuqDwuH9wd-0393u52Od3XlF3OzKY4   राजा शुद्धोदन का पुत्र सिद्धार्थ घर छोड़कर संन्यास के लिए वन की ओर चला गया था। यह सुनकर नगर में सब ओर शोक फैल गया। राजा को गहरा दुख हुआ, और उन्होंने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री और वृद्ध पुरोहित को राजकुमार को ढूँढकर समझाने और वापस लाने के लिए भेजा। मंत्री और पुरोहित चलते-चलते भार्गव मुनि के आश्रम पहुँचे। उन्होंने मुनि से पूछा, “हे मुनिवर! हम उस राजकुमार की खोज में हैं जो जरा और मृत्यु के भय से आपकी शरण में आया था। क्या आप बता सकते हैं, वह अब कहाँ है?” मुनि भार्गव ने उत्तर दिया, “वह राजकुमार अब यहाँ नहीं है। उसने इस संसार में पुनर्जन्म के चक्र को समझा और आत्मज्ञान की जिज्ञासा से वह अराड नामक मुनि के पास गया है, जो एक ज्ञानी और दीर्घबाहु ऋषि हैं।” यह सुनकर मंत्री और पुरोहित अराड के आश्रम की ओर चल पड़े। रास्ते में थोड़ी ही दूर पर उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ को देख लिया। वे उसके पास पहुँचे और आदरपूर्वक उसके निकट बैठ गए। फिर पुरोहित ने प्रेमपूर्वक कहा, “हे कुमार! जब राज...