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सचेतन 2.115 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - जानकी की पुकार

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सीता का संदेश: विरह और प्रतिज्ञा दोनों है  नमस्कार, दोस्तों! आपका स्वागत है हमारे आज के खास सचेतन के इस विचार के सत्र  में, जहाँ हम लेकर आए हैं आपके लिए एक दिल छू लेने वाली कथा, "जानकी की पुकार"। आज हम सुनेंगे वीर हनुमान द्वारा देवी सीता के सन्देश को श्री राम तक पहुँचाने की गाथा। देवी सीता रावण के अंतःपुर में बड़े दुखी और विपन्न अवस्था में थीं। उनके सिर पर एक मात्र वेणी सजी थी और वे दुखी होकर सदा श्री राम की चिंता में डूबी रहती थीं। रावण के भयानक राक्षसियों के बीच फंसी हुई सीता जमीन पर सोतीं और जाड़े की ठंड में उनके शरीर की कान्ति भी फीकी पड़ चुकी थी, जैसे सर्दी में कमलिनी सूख जाती है। हनुमान जी का संदेश: श्रीराम से सीता का संवाद इसी दौरान, वीर हनुमान ने उन तक पहुँचकर न केवल उनका दुख देखा, बल्कि उन्होंने धीरे-धीरे अपने और श्री राम के बारे में बताकर उनके हृदय में विश्वास जगाया। वीर हनुमान के साथ अपने प्रिय श्री राम की भक्ति से प्रेरित होकर, सीता ने उन्हें अपनी व्यथा कह सुनाई। उन्होंने श्री राम को अपनी कान्तिमती चूड़ामणि भी सौंपी, जिसे उन्होंने बड़े यत्न से संभाल के रखा था। देव...

सचेतन 2.99 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - सुग्रीव का संदेश लेकर हनुमान जी लंका पहुँचे।

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"धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम" नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका "धर्मयुद्ध की कहानियाँ" के एक और सचेतन के इस विचार के सत्र में।आज हम सुनेंगे उस अद्वितीय क्षण की कहानी जब महाबली हनुमान जी ने राक्षसराज रावण को श्रीराम के प्रभाव का वर्णन किया। तो चलिए, शुरू करते हैं। हनुमान जी, जो वानरों के प्रमुख थे, सुग्रीव का संदेश लेकर लंका पहुँचे। राक्षसराज रावण के दरबार में उन्होंने शांतभाव से यह अर्थयुक्त बात कही: राक्षसराज! मैं सुग्रीव का संदेश लेकर यहाँ तुम्हारे पास आया हूँ। वानरराज सुग्रीव तुम्हारे भाई हैं। इसी नाते उन्होंने तुम्हारा कुशल-समाचार पूछा है। अब तुम अपने भाई महात्मा सुग्रीव का संदेश सुनो, जो धर्म और अर्थ से परिपूर्ण है और जो इहलोक और परलोक दोनों में लाभदायक है। रावण कहते हैं कहो, हनुमान! सुग्रीव ने क्या संदेश भेजा है? हनुमान जी ने कहा दशरथ नाम से प्रसिद्ध एक राजा हो गये, जो पिताकी भाँति प्रजा के हितैषी, इन्द्र के समान तेजस्वी और रथ, हाथी, घोड़े आदि से सम्पन्न थे। उनके परम प्रिय ज्येष्ठ पुत्र महातेजस्वी, प्रभावशाली महाबाहु श्रीरामचन्द्रजी पिता की आज्ञा स...