सचेतन – 02 विवेकचूडामणि – “इतना कीमती जीवन… और हम उसे किस बात में खो रहे हैं?”
ज़रा ईमानदारी से बताइए… अगर आपको पता चले कि आपको जो जीवन मिला है… वह बहुत ही दुर्लभ है… और आप उसे छोटी-छोटी बातों में खर्च कर रहे हैं… तो कैसा लगेगा? आज का विचार थोड़ा कठोर है… लेकिन अगर समझ आ गया… तो जीवन बदल सकता है। जीवन इतना दुर्लभ क्यों है? विवेक-चूडामणि एक सीधी बात कहती है— मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभ है मतलब क्या? आप सिर्फ जीने के लिए पैदा नहीं हुए… आपके पास सोचने की शक्ति है समझने की क्षमता है और सबसे बड़ी बात— खुद को जानने की योग्यता है जानवर भी खाते हैं, सोते हैं, जीते हैं… लेकिन अपने बारे में सवाल नहीं पूछते आप पूछ सकते हैं। यही आपको खास बनाता है। लेकिन असली समस्या कहाँ है? समस्या यह नहीं कि जीवन नहीं मिला… समस्या यह है कि हम समझते ही नहीं कि इसका उपयोग किस लिए करना है हम पूरा जीवन लगा देते हैं: पैसा कमाने में लोगों को खुश करने में नाम बनाने में दूसरों से तुलना करने में लेकिन कभी रुककर नहीं पूछते— “मैं कौन हूँ?” “मैं क्यों जी रहा हूँ?” तीन सबसे दुर्लभ चीज़ें यह ग्रंथ कहता है— तीन चीज़ें बहुत दुर्लभ हैं: 1. मनुष्य जीवन आपको मिल चुका है 2. मुक्ति की इच्छा यह सबसे ...