संदेश

कहाँ से आते हैं लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सचेतन- 13: आत्मबोध की यात्रा - “मेरे अनुभव कहाँ से आते हैं?”

चित्र
“कभी आपने कहा है— मुझे भूख लगी है… मुझे डर लग रहा है… मैं बहुत खुश हूँ… मुझे गुस्सा आ रहा है… लेकिन कभी आपने खुद से पूछा— ये सब महसूस कौन कर रहा है? क्या आत्मा को भूख लगती है? क्या आत्मा डरती है? या ये सब किसी और से आ रहा है?” पञ्चप्राणमनोबुद्धिदशेन्द्रियसमन्वितम्। अपञ्चीकृतभूतोत्थं सूक्ष्माङ्गं भोगसाधनम्॥ सरल अर्थ हमारे अंदर साँस, मन, बुद्धि और इंद्रियाँ हैं। ये सब मिलकर एक सूक्ष्म शरीर बनाते हैं। यही सूक्ष्म शरीर हमें सुख और दुःख महसूस करने में मदद करता है। हमारे अंदर क्या-क्या है? “शंकराचार्य बताते हैं— हमारे अंदर पाँच प्राण हैं: • साँस अंदर जाना • साँस बाहर जाना • पूरा शरीर चलना • खाना पचना • ऊपर उठने की शक्ति फिर है— मन — जो सोचता है बुद्धि — जो समझती है और हैं दस इंद्रियाँ— • आँख, कान, नाक, जीभ, त्वचा • हाथ, पैर, मुँह, पेट, नीचे के काम ये सब मिलकर सूक्ष्म शरीर बनाते हैं।” अनुभव कैसे होते हैं? “अब एक आसान बात समझो— जब आप कहते हो— ‘मुझे भूख लगी है’ तो आत्मा भूखी नहीं है। भूख प्राण में होती है। जब आप कहते हो— ‘मुझे डर लग रहा है’ तो आत्मा नहीं डरती। डर ...