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सचेतन- 08: सत्-चित्-आनन्द – मनुष्य जीवन की अनमोल यात्रा

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 नमस्कार साथियो, आप सुन रहे हैं सचेतन , जहाँ हम बात करते हैं आत्मिक जागरण की, और उस सत्य की जो हमारे भीतर ही छुपा है। आज का विषय है — “सत्-चित्-आनन्द” — यह कोई शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य जीवन की तीन दिव्य सीढ़ियाँ हैं जो हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर , अस्थिरता से स्थिरता की ओर , और दुख से आनंद की ओर ले जाती हैं। 1. सत् — सत्य और कर्म की शुद्धि सत् अवस्था – मन की अमरता की खोज मन हमेशा कुछ ऐसा चाहता है जिसे समय मिटा न सके , जिसे काल छीन न पाए , जो नाशवान न हो । यह उसकी अमरता की अनंत तलाश है। वह सतत उस सत्य की खोज में रहता है जो शाश्वत है, अविनाशी है, जो जन्म और मृत्यु के चक्र से परे है। जब मन को सत्य का साक्षात्कार होता है, जब वह आत्मा के समीप पहुँचता है, तब धीरे-धीरे मृत्यु का भय लुप्त होने लगता है । यही वह क्षण होता है जब मन अपनी "सत् अवस्था" में प्रवेश करता है — जहाँ उसे वह मिल जाता है जिसे काल या परिस्थिति बदल नहीं सकते । यह अवस्था, न केवल शांति देती है, बल्कि असली अस्तित्व का बोध भी कराती है। “सत्” का अर्थ है — जो सदा है, जो बदलता नहीं । यह शुद्धत...