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सचेतन 2.69: रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - हनुमान जी, सीता जी को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन किए

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इस प्रकार बहुत-सी बातें सोच-विचारकर महामति हनुमान जी ने सीता को सुनाते हुए मधुर वाणी में इस तरह कहना आरम्भ किया—‘इक्ष्वाकुवंश में राजा दशरथ नाम से प्रसिद्ध एक पुण्यात्मा राजा हो गये हैं। वे अत्यन्त कीर्तिमान् और महान् यशस्वी थे। उनके यहाँ रथ, हाथी और घोड़े बहुत अधिक थे॥ उन श्रेष्ठ नरेश में राजर्षियों के समान गुण थे। तपस्या में भी वे ऋषियों की समानता करते थे। उनका जन्म चक्रवर्ती नरेशों के कुल में हुआ था। वे देवराज इन्द्र के समान बलवान् थे। उनके मन में अहिंसा-धर्म के प्रति बड़ा अनुराग था। उनमें क्षुद्रता का नाम नहीं था। वे दयालु, सत्यपराक्रमी और श्रेष्ठ इक्ष्वाकुवंश की शोभा बढ़ाने वाले थे। वे लक्ष्मीवान् नरेश राजोचित लक्षणों से युक्त, परिपुष्ट शोभा से सम्पन्न और भूपालों में श्रेष्ठ थे। चारों समुद्र जिसकी सीमा हैं, उस सम्पूर्ण भूमण्डल में सब ओर उनकी बड़ी ख्याति थी। वे स्वयं तो सुखी थे ही दूसरों को भी सुख देने वाले थे। उनके ज्येष्ठ पुत्र श्रीराम-नाम से प्रसिद्ध हैं। वे पिता के लाडले, चन्द्रमा के समान मनोहर मुखवाले, सम्पूर्ण धनुर्धारियों में श्रेष्ठ और शस्त्र-विद्या के विशेषज्ञ हैं। शत्रुओं...