सचेतन, पंचतंत्र की कथा-15 : "दोस्त की चाल और प्रेम की जीत"
सचेतन, पंचतंत्र की कथा-15 : "दोस्त की चाल और प्रेम की जीत" बुनकर की मुश्किल और रथकार का समाधान: हमारी पिछली कहानी में आपने सुना कि कैसे बुनकर ने राजकुमारी को देखकर उसके प्रेम में अपना दिल खो दिया था और अब उसके बिना जीना मुश्किल हो गया था। उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसने अपने दोस्त रथकार से मरने की बात तक कह दी। लेकिन रथकार ने अपने मित्र की मदद करने का वादा किया और उसे भरोसा दिलाया कि कोई भी काम असंभव नहीं होता। रथकार ने मुस्कराते हुए कहा, "मित्र! अगर यही बात है तो समझो तुम्हारा मतलब पूरा हो गया। मैं आज ही तुम्हें राजकुमारी से मिलवा दूंगा।" बुनकर, जो अब तक अपनी हालत को लेकर हताश था, हैरान होकर बोला, "मित्र, तुम मजाक क्यों कर रहे हो? वह राजकुमारी अपने महल में रक्षकों से घिरी रहती है, वहाँ हवा के अलावा और कोई प्रवेश नहीं कर सकता। ऐसे में वहाँ मेरी कैसे पहुँच होगी?" रथकार की अद्भुत योजना: रथकार ने अपने दोस्त की घबराई बातों को सुनकर मुस्कराते हुए कहा, "मित्र, मेरी बुद्धि और मेरी योजना को देखो।" इसके बाद रथकार ने तुरंत एक पुरानी अर्जुन के पेड़ की लकड...