संदेश

ऊर्जा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सचेतन 3 17 नाद योग अंतरस्थ विषय योग और ध्यान की गहनता का केंद्र

चित्र
नमस्कार श्रोताओं, और स्वागत है इस हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में.  आज हम बात करेंगे "अंतरस्थ विषय" के बारे में, जो योग और ध्यान की गहनता का केंद्र होता है। यह विषय योग साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमारे ध्यान को गहराई तक ले जाने में मदद करता है। आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें। अंतरस्थ विषय का अर्थ: अंतरस्थ विषय का अर्थ है वह आंतरिक केंद्र या विषय जिस पर योगी अपने ध्यान को केंद्रित करता है। यह विषय बाहरी संसार से हटकर हमारे आंतरिक संसार से संबंधित होता है। अंतरस्थ विषय पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी साधना गहरी और स्थिर हो जाती है, और हम आत्म-साक्षात्कार की दिशा में अग्रसर होते हैं। अंतरस्थ विषय के प्रकार: चक्र (ऊर्जा केंद्र): योग में विभिन्न चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना एक प्रमुख अंतरस्थ विषय है। जैसे मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा, और सहस्रार चक्र। इन चक्रों पर ध्यान केंद्रित करके साधक अपनी आंतरिक ऊर्जा को जागृत करता है और चेतना की उच्चतर अवस्था में प्रवेश करता है। श्वेतार्क: श्वेतार्क एक विशेष प्रकार क...

सचेतन 3.03 : नाद योग: ॐ का महत्व

चित्र
नाद योग में ॐ का प्रयोग नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं जो न केवल आध्यात्मिक है बल्कि हमारे मन और शरीर के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। आज का विषय है - नाद योग में प्रार्थना ॐ से आरम्भ क्यों करते हैं। परिचय नाद योग एक प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक पद्धति है जो ध्वनि और संगीत के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें ध्वनि, संगीत, और मंत्रों का उपयोग किया जाता है ताकि मन को शांति और ध्यान की स्थिति में लाया जा सके। और जब हम नाद योग की बात करते हैं, तो ॐ का महत्व सबसे पहले आता है। लेकिन आखिर ॐ ही क्यों? इस प्रश्न का उत्तर हम आज विस्तार से जानेंगे। ॐ का महत्व ॐ, जिसे ओम या औम भी कहा जाता है, एक बीज मंत्र है जिसे संपूर्ण ब्रह्मांड की ध्वनि माना जाता है। यह तीन ध्वनियों से मिलकर बना है: 'अ', 'उ', और 'म'। ये तीन ध्वनियाँ मिलकर संपूर्णता का प्रतीक हैं और इन्हें तीनों लोकों - भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतिनिधित्व भी माना जाता है। 'अ' ध्वनि - स...

सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग

चित्र
अ, ऊ, म ध्वनियों का शरीर पर प्रभाव नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम आपको एक ऐसे विषय के बारे में बताएंगे, जिसे जानकर आपकी योग साधना में चार चांद लग जाएंगे। आज का हमारा विषय है 'ख़ुशी के लिए योग-नाद योग'। यह विषय न सिर्फ आपको योग के महत्व को समझाएगा, बल्कि इसके वैज्ञानिक पहलुओं से भी अवगत कराएगा। तो चलिए, शुरू करते हैं। आधुनिक विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि यह सारा अस्तित्व पलभर का है। जहां कम्पन होता है, वहां ध्वनि होती है। इसलिए यह सारा अस्तित्व एक ध्वनि है। ध्वनियों के इस जटिल संगम की मूल ध्वनि है - अ, ऊ, म। यह तीन ध्वनियां हमारे अस्तित्व की मूल ध्वनियां हैं और इन्हीं से अन्य ध्वनियों का सृजन होता है। मूल ध्वनियां: आप अपनी जीभ का प्रयोग किए बिना सिर्फ यही तीन ध्वनियां अपने मुँह से निकाल सकते हैं। 'अ', 'ऊ' और 'म' अपने मुँह के गड्ढे में अलग-अलग जगह रखते हुए आप इन तीन ध्वनियों को मिला सकते हैं और तमाम दूसरी ध्वनियां बना सकते हैं। अ, ऊ एवं म उन तमाम ध्वनियों का आधार हैं, जिन्हें आप ...