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सचेतन, पंचतंत्र की कथा-41 : लालच और अनदेखी चेतावनी

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"नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका 'सचेतन पॉडकास्ट' के एक और रोमांचक और प्रेरणादायक एपिसोड में। आज की कहानी है 'कौआ, कबूतर और बहेलिये की।' यह कहानी हमें सिखाएगी कि लालच और अज्ञान से बचकर कैसे समझदारी और धैर्य से जीवन में संकटों को टाला जा सकता है। तो चलिए, शुरू करते हैं।" कहानी का आरंभ दक्षिण भारत के महिलारोप्य नामक नगर के पास एक घना और विशाल बरगद का पेड़ था। इस पेड़ पर लघुपतनक नाम का एक बुद्धिमान कौआ रहता था। वह न केवल सतर्क, बल्कि पेड़ पर रहने वाले अन्य पक्षियों का सच्चा मित्र भी था। एक दिन, कौआ चारा चुगने के लिए निकला। उसने देखा कि एक अजीबोगरीब व्यक्ति, जिसका चेहरा डरावना और कपड़े फटे हुए थे, हाथ में जाल और चावल लेकर बरगद की ओर बढ़ रहा था। कौए ने तुरंत समझ लिया कि यह व्यक्ति एक बहेलिया है। चेतावनी का महत्व लघुपतनक ने तेजी से उड़कर सभी पक्षियों को चेतावनी दी: "सुनो दोस्तों! यह बहेलिया हमारे लिए खतरा है। उसके बिछाए चावल विष जैसे हैं। भूलकर भी उन्हें मत खाना।" सभी पक्षियों ने कौए की बात मानी और छिपकर बैठ गए। कबूतरों का आगमन इसी दौरान, चित्रग्रीव नामक क...

सचेतन 2.113 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - अंगद का संकल्प और जाम्बवान का निवारण

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भले ही हममें कितनी भी शक्ति क्यों न हो, धैर्य और समर्पण भी उतना ही महत्वपूर्ण है नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे आज के विशेष सचेतन के इस विचार के सत्र  में, जहाँ हम बात करेंगे वानर सेना के वीर अंगद के उत्साह और जाम्बवान के विवेकपूर्ण निवारण की।दोस्तों, कहानी शुरू होती है उस समय से, जब हनुमान जी ने निशाचरों के साथ लंका को जीत लिया और युद्ध में रावण का वध कर, सीता माता को साथ लेकर, सफल और प्रसन्नचित्त होकर श्रीरामचन्द्रजी के पास वापस लौटने की तैयारी में थे। कपिवर अंगद ने एक अलग ही निर्णय लिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि क्यों न हम सभी जनकनंदिनी सीता को साथ लेकर श्रीराम और लक्ष्मण के पास चलें और उन्हें इस जीत की खबर दें। लंका विजय की ओर अग्रसर वानर सेना के बीच, एक गंभीर विचार-विमर्श चल रहा था। हनुमान जी के द्वारा लंका की खबरें लाने के बाद, अंगद के मन में एक बड़ा ही उत्साहजनक विचार आया। अंगद ने कहा, "हमें लंका जीतनी चाहिए और सीता माँ को मुक्त कराना चाहिए।" उनके इस संकल्प का समर्थन दो अत्यंत बलवान वानर, मैन्द और द्विविद ने किया, जिन्हें पूर्वकाल में ब्रह्माजी से विशेष वरदान प्...