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सचेतन, पंचतंत्र की कथा-40 : तीन मछलियों की कथा

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"नमस्कार, दोस्तों! आप सुन रहे हैं 'सचेतन पॉडकास्ट', जहाँ हम लाते हैं ज्ञानवर्धक कहानियाँ और उनकी सीख। पिछले एपिसोड में हमने टिटिहरी और समुद्र की कहानी सुनी, जो अहंकार, अति आत्मविश्वास और सलाह को नजरअंदाज करने के खतरों पर आधारित थी। टिटिहरी का जोड़ा समुद्र किनारे अपने अंडे रखने का फैसला करता है, जबकि मादा टिटिहरी इस स्थान को असुरक्षित मानती है। नर टिटिहरा अपने अति आत्मविश्वास और समुद्र की ताकत को नकारते हुए यहीं अंडे रखने पर जोर देता है। लेकिन समुद्र ने अपने अहंकार में अंडे बहा दिए, जिससे मादा टिटिहरी की भविष्यवाणी सच हो गई। इस कहानी ने हमें सिखाया कि अहंकार और गलत आकलन का परिणाम हमेशा दुखद होता है। मित्रों और हितैषियों की सलाह मानना, और हर समस्या का हल शांत और समझदारी से निकालना चाहिए। आज की कहानी है - 'तीन मछलियों की कथा।' यह कहानी हमें जीवन में समय पर निर्णय लेने, बुद्धिमत्ता, और साहस का महत्व सिखाती है। तो चलिए, शुरू करते हैं।" किसी तालाब में तीन मछलियाँ रहती थीं। उनके नाम थे: अनागत-विधाता – जो भविष्य की चिंता करते हुए पहले से उपाय कर ले। प्रत्युत्पन्नमति...