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सचेतन, पंचतंत्र की कथा-33 : बंदर और गौरैया की कथा-2

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शास्त्रों में पुत्रों को चार प्रकार का बताया गया है—जात, अनुजात, अतिजात और अपजात। नमस्कार दोस्तों! "सचेतन" के दूसरे एपिसोड में आपका स्वागत है। पिछले एपिसोड में हमने "बंदर और गौरैया" की कहानी सुनी। गौरैया ने अपने घोंसले के टूटने के बाद कहा, "दूसरों को कष्ट पहुंचाकर खुश होने वाला व्यक्ति अपने विनाश की ओर बढ़ रहा होता है।" इसी बात को समझाने के लिए एक और कहानी है। हम आगे एक और कहानी सुनेगी की एक पुत्र की है जिसने अपने पांडित्य के कारण अपने पिता को धुएं से मार डाला।उससे पहले आज हम शास्त्रों में वर्णित पुत्रों के चार प्रकारों के बारे में चर्चा करेंगे। शास्त्रों में पुत्रों को चार प्रकार का बताया गया है—जात, अनुजात, अतिजात और अपजात। जात-पुत्र : यह वह पुत्र होता है जो अपनी माता के गुणों को अपनाता है। उसकी सोच, व्यवहार और कार्यशैली अपनी माता के समान होती है। वह अपनी माता की अच्छाइयों और विशेषताओं को आगे बढ़ाता है। अनुजात-पुत्र : यह पुत्र अपने पिता के गुणों और स्वभाव को अपनाता है। उसकी विचारधारा और व्यक्तित्व अपने पिता के समान होते हैं। वह पिता की आदतों और परंपराओं ...

सचेतन, पंचतंत्र की कथा-32 : बंदर और गौरैया की कथा

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नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका "सचेतन" के इस खास एपिसोड में, जहाँ हम पंचतंत्र की एक और रोचक कहानी लेकर आए हैं। आज की कहानी है, "बंदर और गौरैया।" किसी जंगल में एक शमी के वृक्ष की एक डाल पर गौरय्या का एक जोड़ा अपना घोंसला बनाकर सुखपूर्वक रहता था। एक दिन ठंडी हवाओं के साथ हेमंत ऋतु की बारिश होने लगी। उसी समय एक बंदर, जो ठंड से कांप रहा था और अपने दांतों की ठक-ठक कर वीणा बजा रहा था, उस शमी के वृक्ष के नीचे आकर बैठ गया। वह बारिश और ठंड से बहुत परेशान था। उसे इस हालत में देखकर गौरय्या ने कहा, "तू हाथ-पैर वाला है और इंसान जैसा दिखता है, फिर भी ठंड में यूं परेशान है। अरे मूर्ख! तूने अब तक अपना घर क्यों नहीं बनाया?" गौरय्या की यह बात सुनकर बंदर गुस्से से भड़क उठा और बोला, "तू चुप क्यों नहीं रहती? तेरी यह हिम्मत कैसे हुई कि मेरी स्थिति पर हंसी उड़ाए? यह पंडित जैसी बातें करने वाली और बेहूदा बातें बकने वाली तुम क्या सोचती है? इसे तो मैं अब सबक सिखाऊंगा!" इस प्रकार सोच-विचार करने के बाद बंदर ने कहा, "अरे मूर्ख! तुझे मेरी चिंता करने की क्या जरूरत है? कहा...