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पंचतंत्र की कथा-08 : दंतिल और गोरंभ की कहानी

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पंचतंत्र की रचना करने वाले विष्णु शर्मा एक ऐसे विद्वान ब्राह्मण थे जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने भारतीय नीतिशास्त्र में अपनी गहरी पकड़ बना ली थी। कई लोग विष्णु शर्मा के अस्तित्व पर सन्देह करते हैं, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं है। दरअसल, पंचतंत्र के सभी संस्करणों में उनके नाम को इस ग्रंथ के लेखक के रूप में लिखा गया है, इसलिए इस बात में किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। कहा जाता है कि जब उन्होंने पंचतंत्र की रचना की थी, तब वे लगभग अस्सी वर्ष के थे। उनकी उम्र का यह समय अनुभव और ज्ञान से भरपूर था, और उनका मन सभी प्रकार के भौतिक भोगों और इच्छाओं से मुक्त हो चुका था। विष्णु शर्मा ने स्वयं कहा है, "मैंने इस शास्त्र की रचना अत्यन्त बुद्धिपूर्वक की है जिससे औरों का हित हो।" इसका अर्थ यह है कि वे लोकहित को ध्यान में रखकर कार्य करते थे, और अपनी विद्या को दूसरों के लाभ के लिए समर्पित करना उनका मुख्य उद्देश्य था। पंचतंत्र की रचना के पीछे विष्णु शर्मा का उद्देश्य यही था कि वे अपने ज्ञान को लोकहित के लिए प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने मनु, बृहस्पति, शुक्र, पराशर, व्यास और चा...