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सचेतन 2.98 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लंका में आने का कारण पूछना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना

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"धर्म युद्ध की गाथा: हनुमानजी का पराक्रम" नमस्कार श्रोताओं! स्वागत है आपका हमारे सचेतन के इस विचार के सत्र "धर्मयुद्ध की कहानियाँ" में। आज की कहानी है 'रावण का प्रहस्त के द्वारा हनुमान जी से लंका में आने का कारण पूछना और हनुमान् का अपने को श्रीराम का दूत बताना'। यह कहानी महात्मा हनुमान जी की अद्भुत सूझबूझ और साहस की गाथा है। तो चलिए, शुरू करते हैं। राक्षसों के महाबाहु रावण ने जब भूरी आँखों वाले हनुमान जी को सामने खड़ा देखा, तो वह महान् रोष से भर गया। साथ ही तरह-तरह की आशंकाओं से उसका दिल बैठ गया। वह सोचने लगा... रावण विचार करते हुए कहा क्या इस वानर के रूप में साक्षात् भगवान नन्दी यहाँ पधारे हुए हैं? उन्होंने कैलास पर्वत पर मुझे शाप दिया था। या फिर यह बाणासुर का आगमन तो नहीं हुआ है? इस तरह तर्क-वितर्क करते हुए राजा रावण ने क्रोध से लाल आँखें करके मन्त्रिवर प्रहस्त से कहा... अमात्य! इस दुरात्मा से पूछो, यह कहाँ से आया है? इसके आने का क्या कारण है? प्रमदावन को उजाड़ने और राक्षसों को मारने में इसका क्या उद्देश्य था? मेरी दुर्जय पुरी में इसके आने का प्रयोजन क्या ...