सचेतन 2.91 : रामायण कथा: सुन्दरकाण्ड - हनुमान जी ने चैत्यप्रसाद का विध्वंस किया
नमस्ते और रामायण की रोमांचक गाथा में आपका स्वागत है। आज, हम हनुमान जी के एक और वीरतापूर्ण कारनामे के बारे में जानेंगे, जहाँ वे लंका के चैत्यप्रासाद को तहस-नहस करते हैं और उसके रक्षकों का वध करते हैं। हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया था और रावण के अशोक वाटिका को तहस नहस कर राक्षसों को पराजित कर दिया था। लंका में अफरातफरी मची हुई थी, और हनुमान जी सीता माता को भगवान राम के आने का संदेश देकर वापसी की तैयारी कर रहे थे। तब हनुमान जी का चैत्यप्रासाद नष्ट करने का निर्णय कैसे लिया - लेकिन जाने से पहले, हनुमान जी को ध्यान आया कि लंका में राक्षसों के कुलदेवता का स्थान, चैत्यप्रासाद, अभी भी अछूता है। यह सोचकर कि राक्षसों को और भी कठोर दंड मिलना चाहिए, हनुमान जी ने चैत्यप्रासाद को भी नष्ट करने का फैसला किया। हनुमान जी की चढ़ाई और तेज हो गई - हनुमान जी मेरु पर्वत के शिखर की तरह ऊँचे चैत्यप्रासाद पर चढ़ गए। उनके शरीर से निकलने वाले तेज से पूरा प्रसाद जगमगा उठा, मानो एक दूसरा सूर्य उदय हो गया हो। हनुमान जी द्वारा विध्वंस और गर्जना करते हुए - अपनी अद्भुत शक्ति का प्रदर्शन करते हुए, हनुमान जी ने च...