सचेतन:बुद्धचरितम्-12 तपोवनप्रवेशम् (Entry into the Forest of Austerities):
बुद्ध के तपस्या के लिए वन में प्रवेश का विवरण। https://sachetan.org/home/ बुद्ध ने अपनी साधना की यात्रा में कई तपस्वियों के साथ कुछ समय बिताया। वे उनकी कठिन तपस्याओं को देखते और समझते रहे। कुछ दिन वहां ठहरने के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि अब आगे बढ़ना चाहिए। जब वे वहां से जाने लगे, तो आश्रम के साधु-संत उनके पीछे-पीछे चल पड़े। उनमें से एक वृद्ध संत ने अत्यंत आदरपूर्वक कहा, "हे सौम्य! आपके आने से यह आश्रम जीवन से भर गया है। कृपया इसे छोड़कर मत जाइए। हम सभी तपस्वी आपको अपनी तपस्या में सहभागी बनाना चाहते हैं।" उनकी इस प्रार्थना को सुनकर बुद्ध ने विनम्रता से उत्तर दिया, "आप सभी का धर्म स्वर्ग प्राप्ति के लिए है, लेकिन मेरी अभिलाषा केवल मोक्ष की है। मैं संसार के बंधनों से पूरी तरह मुक्त होना चाहता हूँ। इसलिए इस वन में रहना मेरे उद्देश्य के अनुरूप नहीं है, क्योंकि प्रवृत्ति (संसार की ओर झुकाव) और निवृत्ति (संसार से मुक्ति) का धर्म अलग-अलग होता है।" इसके बाद, एक ब्राह्मण ने बुद्ध की इस गहरी सोच को समझते हुए कहा, "हे ज्ञानी! आपका विचार वास्तव में बहुत ऊँचा और महान...