संदेश

नानक लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सचेतन- 04: गुरु ग्रंथ साहिब में साधना का अर्थ

चित्र
"साधना (Spiritual Practice)" का गुरु ग्रंथ साहिब में अत्यंत सुंदर, सरल और आत्मिक वर्णन किया गया है। यहाँ साधना केवल कोई क्रिया नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग , प्रभु से मिलने की यात्रा , और अहंकार से मुक्त होकर प्रेममय जीवन जीने की प्रक्रिया है। गुरबाणी में साधना को आत्मिक उन्नति, नाम सुमिरन, सेवा और सहज अवस्था के माध्यम से बताया गया है। गुरु ग्रंथ साहिब में साधना के प्रमुख स्वरूप: नाम सुमिरन (ईश्वर के नाम का जप) "ਸਿਮਰਿ ਗੋਬਿੰਦ ਨਾਮੁ ਮਤਿ ਪਾਵਹਿ ॥" Simar Gobind Naam mat paaveh सिमरि गोबिंद नामु मति पावहि ॥ (ईश्वर के नाम का स्मरण करो, तभी सच्ची बुद्धि प्राप्त होती है) भावार्थ: साधना का सबसे बड़ा साधन है – "नाम सुमिरन" । यह ईश्वर के नाम को निरंतर स्मरण करना है — "वाहेगुरु", "एक ओंकार", आदि। सेवा (Selfless Service) "ਸੇਵਾ ਕਰਤ ਹੋਇ ਨਿਹਕਾਮੀ ॥ ਤਿਸੁ ਕੋ ਹੋਤ ਪਰਾਪਤਿ ਸੁਆਮੀ ॥" Seva karat hoye nihkami, tis ko hot prapat swami सेवा करत होइ निहकामी ॥ तिसु को होत परापति स्वामी ॥ (निःस्वार्थ सेवा से प्रभु की प्राप्ति होती है) भावार्थ: गुरबाणी म...