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सचेतन 21 तैत्तिरीय उपनिषद् पुरुष रूपक

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पुरुष के त्याग (बलिदान) से ही सूर्य, चन्द्रमा, इन्द्र, अग्नि, वायु और दिशाएँ उत्पन्न हुईं। ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद भी उसी पुरुष से प्रकट हुए। अर्थात: हर कोश को ऐसे समझो, जैसे वह एक जीवित व्यक्ति हो, जिसके अंग-प्रत्यंग हों। 🌱 तैत्तिरीयोपनिषद् में प्रयोग    अन्नमय कोश (शरीर) इसे “अन्नपुरुष” कहा गया। सिर, हाथ, पैर, हृदय आदि का रूप देकर दिखाया गया कि शरीर भोजन से बना है। प्राणमय कोश (जीवन-शक्ति) इसे “प्राणपुरुष” कहा गया। इसमें प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान – पाँच प्राण को अंग माना गया। मनोमय कोश (मन) इसे “मनःपुरुष” कहा गया। यहाँ विचार, भावना, संकल्प और इंद्रियों को अंग माना गया। विज्ञानमय कोश (विवेक-बुद्धि) इसे “विज्ञानपुरुष” कहा गया। इसमें श्रद्धा (आस्था), सत्य, धर्म और कर्तृत्व को अंग माना गया। आनन्दमय कोश (परमानन्द) इसे “आनन्दपुरुष” कहा गया। इसमें आनन्द, प्रेम, करुणा और शांति को अंग माना गया। मान लीजिए कोई बच्चा पूछे — “बुद्धि क्या होती है?” यदि हम कहें “निर्णय करने की शक्ति”, तो वह अमूर्त लगेगा। लेकिन यदि हम इसे “एक राजा” के रूपक में समझाएँ — जैसे राजा अप...

सचेतन- 09: शेष – हमारी चेतना अनंत है, परंतु अनुभव सीमित

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"शेष – जो बचा रह गया" नमस्कार दोस्तों, हम एक गहरे, बहुत ही सूक्ष्म विषय की बात पर पिछले दिनों चर्चा जारी किए थे — “ शेष ”, यानी वह जो बचा रह जाता है। वह जो हमारी सोच से परे है, अनुभव से बाहर, पर फिर भी हमारे भीतर है। हमारी यात्रा एक प्राचीन वैदिक श्लोक से शुरू होती है, पुरुषसूक्त से — "सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्॥" वह विराट पुरुष, जो सहस्रों सिर, नेत्र और चरणों वाला है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को आवृत्त कर लेता है, फिर भी दश अंगुल — दस अंगुल — उससे आगे विस्तृत है। हमारी चेतना अनंत है, परंतु अनुभव सीमित। चाहे हम सहस्रों विचार करें, सहस्रों दिशाओं में कल्पना फैलाएं, फिर भी कुछ ऐसा है जो पकड़ से बाहर है — वही “शेष” है। पुरुषसूक्त के दशाङ्गुलम् की भांति, वह शेष ईश्वर का, आत्मा का, या पूर्णता का प्रतीक है। हम उसी शेष की खोज करते हैं — जो हमारी सोच से परे, पर अनुभव के बहुत करीब है। यह वाक्य गहरा और दार्शनिक है: "हमारी चेतना अनंत है, परंतु अनुभव सीमित।" इसका सरल और विस्तृत अर्थ कुछ इस प्रकार हो सकता है...