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सचेतन:बुद्धचरितम्-18 मारविजय

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सचेतन:बुद्धचरितम्-18 मारविजय महर्षि की मोक्ष यात्रा और कामदेव की हार एक समय की बात है, जब एक महान ऋषि, जो राजर्षियों के वंश में उत्पन्न हुए थे, मोक्ष प्राप्ति के लिए गहन तपस्या में लीन हो गए। उन्होंने संकल्पपूर्वक ध्यान में बैठने का निश्चय किया। उनके इस दृढ़ निश्चय से संपूर्ण संसार प्रसन्न हो गया, लेकिन सच्चे धर्म (सद्धर्म) का विरोधी कामदेव (मार) भयभीत हो गया। कामदेव के तीन पुत्र थे— विभ्रम (भ्रम), हर्ष (आनंद), और दर्प (घमंड) । उसकी तीन कन्याएँ थीं— अरति (विरक्ति), प्रीति (लालसा), और तृषा (तृष्णा) ।  कामदेव नाम के देवता को लोग प्रेम और आकर्षण का देवता मानते हैं  उसके तीन बेटे थे और तीन बेटियाँ थीं। विभ्रम , जिसका मतलब है भ्रम या उलझन, हर्ष , यानी आनंद या खुशी, और दर्प , जो घमंड या अभिमान को दर्शाता है। कामदेव की तीन बेटियाँ भी थीं: अरति , जिसका अर्थ है विरक्ति या मन का हटना, प्रीति , यानी लालसा या मोह, और तृषा , जो तृष्णा या इच्छा को दर्शाती है। इस तरह कामदेव के परिवार में ऐसे सदस्य थे, जो इंसान के मन में तरह-तरह की भावनाएँ और इच्छाएँ पैदा करते थे—कभी भ्रम, कभी खुशी, कभ...