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सचेतन- 5: सत्य पर गहन ध्यान

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निदिध्यासन (Nididhyasanam) – "ध्यान और आत्मसात" सुने और समझे हुए ज्ञान को ध्यानपूर्वक आत्मसात करना, अर्थात उस ज्ञान को अपने जीवन और चेतना में पूरी तरह उतारना। निदिध्यासन (Nididhyasana) – सत्य पर गहन ध्यान निदिध्यासन का अर्थ है — किसी सत्य, विचार, मंत्र या उपदेश पर बार-बार, एकाग्र होकर ध्यान करना। यह केवल सोचने भर की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मन और बुद्धि को पूरी तरह उसी विचार में स्थिर कर देना है। यह ध्यान, मनन से एक कदम आगे की अवस्था है — जहाँ विचारों का विश्लेषण नहीं होता, बल्कि सत्य को आत्मसात किया जाता है। श्रवण, मनन और निदिध्यासन: आत्मज्ञान की तीन सीढ़ियाँ श्रवण (श्रवणम्) — गुरु या शास्त्र से सत्य सुनना। मनन (मन्णनम्) — सुनी हुई बातों पर विचार करना, संदेहों का समाधान करना। निदिध्यासन (निदिध्यासन्) — उस सत्य में दृढ़ हो जाना; उसे जीवन का अनुभव बना लेना। उदाहरण: जैसे कोई कहे “ अहं ब्रह्मास्मि ” (मैं ब्रह्म हूँ)। पहले आप इसे सुनते हैं (श्रवण), फिर सोचते हैं , "क्या मैं वास्तव में शरीर नहीं, आत्मा हूँ?" (मनन), अंत में, आप इस सत्य को जीने लगते हैं , यही निदिध्...