सचेतन, पंचतंत्र की कथा-24 : सिंह और खरगोश की कथा-3
नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका "सचेतन" के इस विचार सत्र में, जहाँ हम पंचतंत्र से प्रेरणादायक कहानियाँ सुनते हैं। आज की कहानी में एक मतवाले सिंह 'भासुरक' की है, जो जंगल के जानवरों को अपने बल के घमंड में प्रतिदिन मारता था। परेशान जानवरों ने सिंह से समझौता किया कि हर दिन एक जानवर अपनी बारी से उसका भोजन बनने आएगा, जिससे उनका सर्वनाश रुक सके। सिंह ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया और जानवर थोड़े राहत महसूस करने लगे। एक दिन खरगोश की बारी आई। खरगोश चिंतित था लेकिन उसने अपनी चतुराई से सिंह को मारने की योजना बनाई। रास्ते में उसे एक कुआँ मिला, और उसकी परछाई देखकर उसने सोचा कि इसी कुएं का इस्तेमाल कर सिंह को गुस्सा दिलाकर फंसाया जा सकता है। सिंह के पास देर से पहुँचने पर उसने सिंह से कहा कि एक और सिंह उसे रोक रहा था और दावा कर रहा था कि वही जंगल का असली राजा है। इससे सिंह को बहुत गुस्सा आया और उसने उस दूसरे सिंह को मारने का निश्चय किया। खरगोश सिंह को लेकर उस कुएं के पास पहुंचा जिसे उसने पहले देखा था। उसने सिंह से कहा, "स्वामी! आपके तेज से कौन मुकाबला कर सकता है? आपको दूर से ही ...