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सचेतन 3.03 : नाद योग: ॐ का महत्व

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नाद योग में ॐ का प्रयोग नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं जो न केवल आध्यात्मिक है बल्कि हमारे मन और शरीर के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। आज का विषय है - नाद योग में प्रार्थना ॐ से आरम्भ क्यों करते हैं। परिचय नाद योग एक प्राचीन भारतीय आध्यात्मिक पद्धति है जो ध्वनि और संगीत के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसमें ध्वनि, संगीत, और मंत्रों का उपयोग किया जाता है ताकि मन को शांति और ध्यान की स्थिति में लाया जा सके। और जब हम नाद योग की बात करते हैं, तो ॐ का महत्व सबसे पहले आता है। लेकिन आखिर ॐ ही क्यों? इस प्रश्न का उत्तर हम आज विस्तार से जानेंगे। ॐ का महत्व ॐ, जिसे ओम या औम भी कहा जाता है, एक बीज मंत्र है जिसे संपूर्ण ब्रह्मांड की ध्वनि माना जाता है। यह तीन ध्वनियों से मिलकर बना है: 'अ', 'उ', और 'म'। ये तीन ध्वनियाँ मिलकर संपूर्णता का प्रतीक हैं और इन्हें तीनों लोकों - भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतिनिधित्व भी माना जाता है। 'अ' ध्वनि - स...

सचेतन 3.02 : नाद योग: ख़ुशी के लिए नाद योग

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अ, ऊ, म ध्वनियों का शरीर पर प्रभाव नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका हमारे विशेष नाद योग (योग विद्या) पर सचेतन के इस विचार के सत्र  में। आज हम आपको एक ऐसे विषय के बारे में बताएंगे, जिसे जानकर आपकी योग साधना में चार चांद लग जाएंगे। आज का हमारा विषय है 'ख़ुशी के लिए योग-नाद योग'। यह विषय न सिर्फ आपको योग के महत्व को समझाएगा, बल्कि इसके वैज्ञानिक पहलुओं से भी अवगत कराएगा। तो चलिए, शुरू करते हैं। आधुनिक विज्ञान ने यह साबित कर दिया है कि यह सारा अस्तित्व पलभर का है। जहां कम्पन होता है, वहां ध्वनि होती है। इसलिए यह सारा अस्तित्व एक ध्वनि है। ध्वनियों के इस जटिल संगम की मूल ध्वनि है - अ, ऊ, म। यह तीन ध्वनियां हमारे अस्तित्व की मूल ध्वनियां हैं और इन्हीं से अन्य ध्वनियों का सृजन होता है। मूल ध्वनियां: आप अपनी जीभ का प्रयोग किए बिना सिर्फ यही तीन ध्वनियां अपने मुँह से निकाल सकते हैं। 'अ', 'ऊ' और 'म' अपने मुँह के गड्ढे में अलग-अलग जगह रखते हुए आप इन तीन ध्वनियों को मिला सकते हैं और तमाम दूसरी ध्वनियां बना सकते हैं। अ, ऊ एवं म उन तमाम ध्वनियों का आधार हैं, जिन्हें आप ...

सचेतन 3.01 : नाद योग: एक आध्यात्मिक सफर

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नमस्कार दोस्तों, आप आज सचेतन के विचार के इस सत्र में सुनेगें 'नाद योग: एक आध्यात्मिक सफर' के बारे में । आज के इस विचार के सत्र में हम बात करेंगे नाद योग की, इसकी उत्पत्ति, महत्व और कैसे यह आपके जीवन में शांति और संतुलन ला सकता है। परिचय नाद योग:  नाद योग, जिसे ध्वनि योग भी कहा जाता है, योग का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण अंग है। नाद का मतलब होता है ध्वनि या कंपन, और योग का मतलब होता है जुड़ना। इस प्रकार, नाद योग का अर्थ है ध्वनि या संगीत के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के साथ जुड़ना। यह योग की एक ऐसी पद्धति है जिसमें ध्वनि के माध्यम से ध्यान और आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया होती है। नाद योग का इतिहास नाद योग की उत्पत्ति वेदों और उपनिषदों में बताई गई है। इसे प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा साधना का एक प्रमुख साधन माना जाता था। नाद योग के माध्यम से वे उच्चतम चेतना की अवस्था को प्राप्त करते थे। यह योग पद्धति न केवल भारतीय संस्कृति में बल्कि तिब्बती बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। नाद योग के प्रकार नाद योग को मुख्य रूप से दो प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है: आहट नाद : यह बाहरी...