सचेतन 189: आत्म स्मृति से क्रांति उत्पन्न हो सकती है

क्या आपका मन आपके जीवन में प्रेम के संगीत का अनुभव करता है? 

अज्ञानता का अंधकार बहुत घना है। हम मनुष्य-जाति के पिछले तीन-चार हजार वर्षों से इसी अंधकार का इतिहास बनते जा रहे हैं जो सिर्फ़ संघर्ष, युद्ध, हिंसा, ईर्ष्या, घृणा, क्रोध और विध्वंस करती है।अज्ञानता ही हमारे सारे दुख और असफलता का कारण है जिससे एक ऐसा समाज निर्मित हो रहा है जहां अब तक कोई पंद्रह हजार युद्ध हो चुके हैं। 

हम शायद लड़ते ही रहते हैं और रोज हम छोटी-छोटी हिंसा कर रहे हैं उसका तो कोई आकलन नहीं, कोई गणना नहीं है। अब मनुष्य-जाति का मस्तिष्क किसी बहुत गहरे रोग से पीड़ित होता जा रहा है। 

हमारे पास शांति का समय नहीं है क्योंकि हमने अपने जीवन को दो खंडों में बांटा रखा है एक जहां हम युद्ध करते हैं और युद्ध से समय अगर बच जाये तो हम दूसरे खंड में युद्ध की तैयारियों में जीते हैं। 

शांति क्या है हमने अब तक नहीं जानी इसका कहीं कोई पता भी नहीं मिल रहा है। जब तक शांति नहीं होगी तो कोई आनंद की किरण और प्रेम का संगीत नहीं सुनाई पड़ेगा। 

क्या आपका मन आपके जीवन में प्रेम के संगीत का अनुभव करता है? क्या आप अनुभव करते हैं की आपके भीतर प्रेम की सुगंध है जो आपके जीवन को धन्य और कृतार्थ कर देगा? 

अगर हमने शांति और प्रेम अनुभव नहीं किया है तो जीवन अर्थहीन या मीनिंगलेसनेस है। हम कल की आशा करते है की शायद कल सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जिसका आज गलत है उसका कल कैसे ठीक होगा? 

अगर आज दुख से भरा है तो स्मरण रखें कल आनंद से भरा हुआ नहीं हो सकता है क्योंकि कल का जन्म तो आज से होगा। कल की सुख की आशा में आज के दुख को हम झेले जा रहे हैं। कल के आनंद की कल्पना में आज की पीड़ा को सहा जा सकता है लेकिन कल के आनंद को पैदा नहीं किया जा सकता है। 

हम क्या अनुभव करते हैं आनंद को केवल आशा के रूप में और जीवन के दुख के रूप में। यह कोई सिद्धांत की बात नहीं है। 

समय है की सचेतन होयें और अपने जीवन को थोड़ा सा खोल कर देखें सीधा तथ्य दिखाई देगा और जीवन का संबंध इस पहले तथ्य से मिलेगा की जिस भांति हम जीवन को जी रहे हैं उस भांति कहीं कोई, आनंद का फूल उसमें नहीं लगने वाला है। इसीलिए कल की आशा पर की कल सब ठीक हो जाएगा, कल आने वाले वर्ष या आने वाली जिंदगी में, परलोक में पुर्नजन्म में सब ठीक हो जाएगा ये सब कल की आशा का विस्तार है। 

कोई सोचता हो कि इस जन्म के बाद अगले जन्म में सब ठीक हो जाएगा। वह उसी तरह की भ्रांति में है जिस तरह की भ्रांति में जो सोचता है आज दुख है कल शांति, कल सुख हो जाएगा। कोई सोचता हो मोक्ष में सब ठीक हो जाएगा तो भ्रांति में है। क्योंकि कल मुझसे पैदा होगा। आने वाला जन्म भी, मोक्ष भी, जो भी होने वाला है वह मुझ से पैदा होगा। और अगर मेरा आज अंधकारपूर्ण है तो कल मेरा प्रकाशित नहीं हो सकता। 

फिर क्या हम निराश हो जाएं और कल की सारी आशा छोड़ दें? मैं आपसे कहता हूँ कि निश्चित ही कल के प्रति कोई आशा रखने का कारण नहीं है।

लेकिन इससे निराश होने का भी कोई कारण नहीं है। आज के प्रति आशा से भरा जा सकता है। आज को परिवर्तित किया जा सकता है। मैं जो हूँ उस होने में क्रांति लाई जा सकती है। 

मैं कल क्या होऊंगा इसके द्वारा नहीं बल्कि जो मैं अभी हूं उसके ज्ञान, उसके बोध उसके प्रति जागरण से, उसे जान लेने से। आत्म स्मृति से क्रांति उत्पन्न हो सकती है।

आत्म स्मृति या आत्मज्ञान का आधार स्वयं का ज्ञान को शामिल करना होता है , जिसका उपयोग स्वयं क्या है, स्वयं क्या था और स्वयं क्या हो सकता है, इसके बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाता है । 

यदि मैं जान सकूं स्वयं को तो वह दीया उपलब्ध हो जाएगा जो मेरे जीवन से अंधकार को नष्ट कर देगा और स्वयं को जाने बिना और न कोई दीया है और न कोई प्रकाश है, न कोई आशा है। पहली बात हम स्वयं को नहीं जानते हैं। ये जान लेना स्वयं को जानने के प्रति पहला चरण है।


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