#RudraSamhita https://sachetan.org/ भगवान शिव की भक्ति सुखमय, निर्मल एवं सनातन रूप है तथा समस्त मनोवांछित फलों को देने वाली है। यह दरिद्रता, रोग, दुख तथा शत्रु द्वारा दी गई पीड़ा का नाश करने वाली है। जब तक मनुष्य भगवान शिव का पूजन नहीं करता और उनकी शरण में नहीं जाता, तब तक ही उसे दरिद्रता, दुख, रोग और शत्रु जनित पीड़ा, ये चारों प्रकार के पाप दुखी करते हैं। आर्थिक चिन्तन में दरिद्रता चक्र (cycle of poverty) उस स्थिति को कहते हैं जिसमें एक बार गरीबी (दरिद्रता) की स्थिति आने के बाद वह सदा के लिये बनी रहे, यदि कोई बाहरी हस्तक्षेप न किया जाय। आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक के भेद से त्रिविध दुःख की निवृत्ति को ही यहां दुःखान्त कहा गया है । केवल ईश्वर के अनुग्रह से ही इसकी प्राप्ति होती है । ज्ञान अथवा वैराग्य से भी इसकी उपलब्धि असंभव है । यह दुःखान्त अनात्मक और सात्मक भेद से दो प्रकार का है । जो वास्तविक न हो:"वह काल्पनिक बातें सबको सुनाता रहता है, काल्पनिक, कल्पित, ख़याली, मनगढ़ंत, कपोल कल्पित, कपोलकल्पित, अवास्तविक, अयथार्थ, झूठा, हवाई, अप्रकृत, अयथातथ, अयाथार्थिक. जिस...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
Please Join Sachetan every day on the Zoom link https://zoom.us/meeting/register/tJIuceGhrzkvG9OPcFHjw3da-BCVGG0YY5c.