सचेतन 124 : श्री शिव पुराण- शतरुद्र संहिता- प्रार्थना, ध्यान और विचार का श्रवण एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है

शांत, शुद्ध और निर्मल चित्त से  शिव की प्राप्ति संभव है! 

सचेतन का श्री शिव पुराण पर विशेष विचारों के चिंतन का यह 124 वाँ सत्र है और सबसे पहला विचार यह था की  श्री शिव पुराण के ज्ञान मात्र से ही आपके आंतरिक विकास की प्रबल संभावनाएं बढ़ जाती हैं!

सचेतन में विचार की अभिव्यक्ति से हमें ऐसा महसूस हो रहा है की आप सभी के अंदर आंतरिक विकास की प्रबल संभावनाएं हैं, शिवपुराण की उत्कृष्ट महिमा आपके जीवन को मंगलकारी तथा पवित्र बना सकता है। 

कहते हैं की शुद्ध निर्मल चित्त से  शिव की प्राप्ति संभव है! श्रीशिवपुराण का माहात्म्य आपके इन्द्रिय, अर्थ, मन, बुद्धि, आत्मा, अव्यक्त माया, और पुरुष इन सभी की तीव्रता को रूपांतरित कर सकती है। जब भी आप किसी क्रिया मन लीन रहते हैं तो उस क्रिया के परिणाम को अंतर्भाव से महसूस करना महत्वपूर्ण है जिससे आपका संपूर्ण शरीर और मन और आत्मा आनन्दमय होती है।

हमको एक बात और भी ध्यान में रखना चाहिए की प्रचंड कलियुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्मों से दूर रहेंगे। इस विचार पर भी हम लोगों ने कई कथा का श्रवण भी किया है और इसकी एक कथा में हम सब ने सुना था की गंगा-यमुना के संगम स्थल परम पुण्यमय प्रयाग में, सत्यव्रत में तत्पर रहने वाले महातेजस्वी महाभाग महात्मा मुनियों ने एक विशाल ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। महात्मा मुनियों ने श्री सूत जी से कहा की तीनों लोकों में भूत, वर्तमान और भविष्य तथा और भी जो कोई वस्तु है, वह आपसे अज्ञात नहीं है, आप हमारे सौभाग्य से इस यज्ञका दर्शन करने के लिये यहाँ पधार गये हैं और इसी व्यास से हमारा कुछ कल्याण करने वाले हैं; क्योंकि आपका आगमन निरर्थक नहीं हो सकता। हमने पहले भी आपसे शुभाशुभ तत्त्व का पूरा-पूरा वर्णन सुना है; किंतु उससे तृप्ति नहीं होती, हमें उसे सुनने को बारंबार इच्छा होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम सभी को सचेतन के विचार को बारंबार सुनने का अभ्यास करना चाहिए। 

कल बात किया था की दक्षिण भारत में पांच भव्य मंदिरों की रचना की गई थी। हर एक मंदिर में एक लिंग स्थापित किया गया था, जो पंचतत्वों में से एक तत्व को दर्शाता है। अगर आप “जल” तत्व के लिए साधना करना चाहते हैं तो आप तिरुवनईकवल जाएं। आकाश तत्व के लिए आप चिदंबरम जाएं, वायु तत्व के लिए कालाहस्ती, पृथ्वी तत्व के लिए कांचीपुरम और अग्नि तत्व की साधना करने के लिए आप थिरुवन्नामलई जा सकते हैं। ये मंदिर पूजा के लिए नहीं, साधना के लिए बनाए गए थे।

ऐसे ही आपको अगर किसी कर्म में धर्म में या ज्ञान में मन लगाना हो तो अपने विचारों से दूर न भागें । बल्कि मन को शांत करने का मतलब है कि हम अपने मन के विचारों से परेशान न हों और इसे एक मानसिक प्रक्रिया समझकर इस पर ज़्यादा ध्यान न दें।लेकिन योग साधना का प्रारंभ ज़रूर कर दें।

मन के विचारों से मुक्ति पाने और उन्हें शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है जर्नलिंग करना, यानी अपने विचारों को लिखना। लिखने से विचारों को एक दिशा मिलती है और आप हल्का भी महसूस कर सकते हैं। इसलिए आज से ही एक डायरी बना लें और आपके मन में जो कुछ भी आए उसे लिखते जाएं।

किसी शांत वातावरण में बैठें और गहरी सांस लें। ऐसे ही अपनी हर सांस पर आंखें बंद करके ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश करें। यह एक बेहद आसान प्रक्रिया है, मगर आपको इसके अच्छे परिणाम सिर्फ नियमित करने से ही मिलेंगे। इसलिए पहली बार में आपको सफलता हासिल होगी, यह विचार छोड़ दें।


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