सचेतन- 43 –आत्मबोध “सूरज को जगाना नहीं पड़ता”
क्या आपने कभी सूर्योदय को ध्यान से देखा है? सूरज अचानक नहीं निकलता। पहले हल्की लालिमा फैलती है। अंधेरा थोड़ा कम होता है। फिर धीरे-धीरे सूरज खुद दिखाई देने लगता है। आत्मबोध के आज के विचार में हम यही बात करेंगे की — आत्मा को जगाना नहीं पड़ता। सिर्फ अज्ञान हटाना पड़ता है। और जैसे ही अज्ञान हटता है, आत्मा अपने आप प्रकट हो जाती है। आज इसे बहुत सरल और दिल से समझते हैं। सूरज का उदाहरण आज का विचार है की : जैसे अरुणोदय — सुबह की लालिमा — रात के घने अंधेरे को हटाती है, और फिर सूरज स्वयं चमकने लगता है। वैसे ही सही ज्ञान पहले अज्ञान को हटाता है, फिर आत्मा स्वयं प्रकाशित हो जाती है। ध्यान दीजिए — सूरज को किसी ने जलाया नहीं। वह पहले से था। बस अंधेरा हटना था। आत्मा को रोशनी की ज़रूरत नहीं हम सोचते हैं — “मुझे आत्मा का अनुभव करना है।” “मुझे आत्मज्ञान पाना है।” लेकिन शंकराचार्य कह रहे हैं — आत्मा को अनुभव की ज़रूरत नहीं। वह पहले से प्रकाशित है। जैसे बिजली पहले से घर में है, बस स्विच ऑन करना है। जैसे आईना साफ़ हो जाए तो चेहरा दिखने लगता है, चेहरा नया नहीं बनता। अज्ञान क्या...